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भ्रष्टाचार एक अभिशाप

पोस्टेड ओन: 10 Oct, 2011 जनरल डब्बा में

‘भ्रष्टाचार’ आज का सबसे भयानक लेकिन चर्चित शब्द,आम आदमी का गला घोटने का और ख़ास लोगों की सेवा का हथियार.वोह हथियार जिसे देश के पैसे का एक बड़ा भाग विदेशी बैंको में पहुँच चूका है.एक ऐसा हथियार जिससे गरीबी नहीं गरीब मिटता है.
भ्रष्टाचार ऐसा हथियार जिसे हर शख्स कभी न कभी किसी न किसी रूप में  इस्तेमाल करता है मजबूरी में ही सही.और यह मजबूरी इन्तहा तक पहुँच जाती है जब आपका पाला सरकारी दफ्तरों से पड़ जाए..महकमा पुलिस का हो या कस्टम का आप स्कूल में हो या सरकारी अस्पताल में , भ्रष्टाचार   नमक राक्षस हर जगह मिल जायेगा ,आम आदमी को राशन कार्ड बनवाना हो या पासपोर्ट या कोई और दस्तवेज़ एक सजा होती है,दफ्तरों के चक्कर काट काट कर आदमी के जूते घिस जाते हैं…
और किसी करणवश आजकल भ्रष्टाचार अपने चरम पर है,किसी भी आफिस में अगर आप का कोई ‘लिंक’ है तो काम आसानी से हो जायेगा और अगर नहीं है तो काम पूरा करवाने में छठी का दूध याद आ जायेगा…

कोई जिंदा आदमी जिसे सरकारी दस्तावेजों में मारा हुआ घोषित कर दिया गया है खुद को जिंदा साबित करने के लिए चक्कर लगता है…
तो कहीं कोई विधवा जो विधवा पेंशन की हकदार है दफ्तरों के चक्कर काट काट कर मर जाती है…और विधवा पेंशन का पैसा ‘मृत’  नेताओं और कर्मचरियों(जिनकी आत्मा मर चुकी है)  की बीवियां को मिल जाता है…

कहीं कोई ‘ आम’ आदमी राशन कार्ड बनवाने को तरसता है तो कहीं किसी के दो दो राशन कार्ड बन जाते हैं…

इसी भ्रस्टाचार नामक हथियार का इस्तेमाल कर्मचारियों का एक वर्ग जिसे हम बाबू के नाम से जानते हैं बखूबी जानता है इस प्राणी से हम सबका पाला गाहे बगाहे पड़ ही जाता है अगर कभी आप भष्टाचारी बाबुओं के चक्रव्यूह में फंस जाएँ तो सिर्फ एक ही चीज़ आपको बचा सकती है.और वोह है……(खाली जगह भरें)
दुसरे सरकारी कर्मचारियों के साथ भी कमोबेश   इसी तरह का मसला है,पिछले कुछ समय में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुँच चूका है. शायद आज़ादी के बाद सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार वाला समय..?
और जब कोई शख्स इस दानव के खिलाफ खड़ा होता है तो हम को भी उसके  साथ कंधे से कन्धा मिलाकर खड़ा होना चाहिए…

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

susmit singh के द्वारा
June 10, 2013

लाजवाब

shreya के द्वारा
July 22, 2012

nice निबंध

    syeds के द्वारा
    April 21, 2013

    धन्यवाद श्रेया जी…

chandanrai के द्वारा
March 20, 2012

आदरणीय साहब, आपने हर महत्वपूर्ण बिंदु को छुआ है और उसका आंकलन किया है ! बहुत सटीक विश्लेषण और बिलकुल ठीक विचार ! बहुत बेहतर Pls. comment on http://chandanrai.jagranjunction.com/मेरे लहू

    syeds के द्वारा
    April 21, 2013

    धन्यवाद चन्दन जी

dineshaastik के द्वारा
January 28, 2012

कृपया इसे भी पढ़ें- क्या यही गणतंत्र है http://dineshaastik.jagranjunction.com/

December 30, 2011

सय्यद भाई नमस्कार ! कहाँ गुम हो गए थे जनाब इतने दिनो के बाद दिखे…..वो भी अबोध के ब्लॉग पर देखा तो रहा नहीं गया सोचा हैलो कर लूँ….सब खारियत तो है ना? http://www.drsuryabali.jagranjunction.com

    Syeds के द्वारा
    January 4, 2012

    सूर्य बाली जी, बस थोडा व्यस्तता की वजह से बहुत कम आना हो पाता है…

dineshaastik के द्वारा
December 28, 2011

आपके आलेख का एक-एक शब्द सच है। हमें सचमुच कुछ करना होगा। अब केवल लिखने से काम नहीं चलेगा। हमें दूसरी आजादी के लिये तैयार रहना होगा। http://dineshaastik.jagranjunction.com/

    Syeds के द्वारा
    January 4, 2012

    जी बिलकुल… हमें भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाना होगा./..

naturecure के द्वारा
December 19, 2011

आदरणीय भाई साहब सादर अभिवादन ! आपको तथा आपके पूरे परिवार को नव वर्ष की अग्रिम शुभ कामनाएं | आपकी अगली रचना का इंतजार है ………….

    Syeds के द्वारा
    January 4, 2012

    भाई आपके लिए भी नव वर्ष सफलता और उन्नति लेकर आये….

shuklabhramar55 के द्वारा
November 2, 2011

सैयद भाई अभिवादन और अग्रिम रूप से ढेर सारी हार्दिक शुभ कामनाएं बकरीद के शुभ अवसर पर आप और सारे परिवार को… सब मंगलमय हो और शुभ हो सब एक दूसरे के हित के लिए अपने हित का बलिदान करें और उस प्रभु और अल्लाह ताला पैगम्बर की सीख को मानें जाने —इंसान और इंसानियत बनी रहे इस धरती पर ..आइये अपना दिल और बड़ा बनाएं …फौलाद सा मजबूत और दरिया दिल … शुक्ल भ्रमर ५

    Syeds के द्वारा
    November 3, 2011

    भ्रमर भाई, आपको भी यिद बहुत बहुत मुबारक हो….बहुत अच्छी बात की आपने की हम अपने हितों का बलिदान करें दुसरे के लिए…

Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
October 26, 2011

आदरणीय भाई साहब सादर अभिवादन ! आपको तथा आपके पूरे परिवार को दीप पर्व की बहुत बहुत शुभ कामनाएं |

    Syeds के द्वारा
    October 26, 2011

    धन्यवाद आपका, आपको और आपके परिवार को भी दीपावली मुबारक हो…

Lahar के द्वारा
October 25, 2011

प्रिय सैयद जी सप्रेम नमस्कार भ्रष्टाचार से तो हम सभी परेशान है | और इसके अंत के लिए हम सभी को एक साथ आना होगा | आपने एक अच्छे मुद्दे को जागरण मंच पर उठाया | http://lahar.jagranjunction.com/2011/10/24/%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF/

    Syeds के द्वारा
    October 26, 2011

    प्रिय लहर जी, आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं.. धन्यवाद आपका http://syeds.jagranjunction.com

Paarth Dixit के द्वारा
October 22, 2011

सही कहा है सैयद जी, भ्रष्टाचार नुमा दानव आज समाज के लिए सबसे बड़ा अभिशाप बन चुका है..और इस दानव का अंत करने के लिए हम सभी को एक साथ कंधे से कंधा मिलकर खड़ा होना पड़ेगा..एक अच्छे एवं सार्थक लेख पर हार्दिक बधाई..और दीपावली की आपको ढेरो शुभकामनाये…

    syeds के द्वारा
    October 23, 2011

    पार्थ भाई,आपको भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं. http://syeds.jagranjunction.com

Abdul Rashid के द्वारा
October 22, 2011

सईद भाई अस्सलामोअलैकुम सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई सप्रेम अब्दुल रशीद http://singrauli.jagranjunction.com

    syeds के द्वारा
    October 23, 2011

    राशिद भाई,वालेकुमअस्सलाम , धन्यवाद् आपका.. http://syeds.jagranjunction.com

Mayur के द्वारा
October 21, 2011

इस तरह के निबंध प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों द्वारा भ्रष्टाचार पर लिखे जाते हैं… कि कितना भ्रष्टाचार हो रहा है, दफ्तरों में घूस देनी पड़ती है… और अंत में निष्कर्ष लिखते हैं की युवाओं को आगे आना होगा, कंधे से कंधा मिलकर लड़ना होगा… इत्यादि-इत्यादि बेदम सा निबंध है…

    syeds के द्वारा
    October 22, 2011

    मयूर जी, सबसे पहले तो प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद..मै कोई लेखक नहीं हूँ, बस जो दिल में आता है लिख देता हूँ…….आप अगर लेख को बेहतर बनाने के लिए थोडा मार्गदर्शन करते तो और बेहतर होता… अगर आपको सच में अच्छे लेख पढने हैं तो..आप आदरणीय राजकमल जी के ब्लॉग… http://rajkamal.jagranjunction.com/ या अमिता जी के ब्लॉग http://amitadixit.jagranjunction.com/ या निशा जी के ब्लॉग http://nishamittal.jagranjunction.com/ को पढ़ सकते हैं… यहाँ मैंने कुछ ही ब्लोगों का रेफ़रन्स दिया है..वैसे और भी बहुत सारे ब्लॉगर जैसे वाहिद जी, भ्रमर जी, डाक्टर कैलाश साहब,अबोध जी इत्यादि भी बहुत अच्छा लिखते हैं… http://syeds.jagranjunction.com/

    mayurkota के द्वारा
    October 24, 2011

    ज़रा इन लेखों पर गौर फरमाइए… “”साहित्य के क्षेत्र में ब्रांड होते ही आदमी ‘भोगे हुए यथार्थ’ की बात भूल जाता है और नई प्रतिभा को प्रेरित करने का काम छोड़ देता है। उसके विरोध के स्वर भी धीमे पड़ जाते हैं। सफल होते ही लेखक दावतों और सम्मान समारोहों में डूब जाता है। सेलिब्रिटी सर्कस में सारा जुनून स्वाहा हो जाता है।” “किताबें कायरता रचें, इससे बड़ी विडंबना क्या हो सकती है? कहीं ऐसा तो नहीं कि हम किताबों के बादलों से गुजरते हैं, परंतु न तो उनकी नमी हमें छूती है और न हम उसमें छिपी बिजली को थामने का प्रयास करते हैं? क्या हम पढ़ाई के नाम पर केवल रस्म अदायगी कर रहे हैं, जैसे हमारी प्रार्थनाएं केवल निजी डरों से प्रेरित हैं और हमारे पश्चाताप भी कपड़ों का मैल निकाले बिना मात्र पानी में डुबाकर सुखाने की तरह हैं, जैसा कामचोर कपड़े धोने वाली करती है? हम तो गंगा में भी सुरक्षा का रेनकोट पहनकर डुबकी लगाते हैं।” “यह भारतीय विशेषता है कि हम विदेश जाकर या देश में रहकर विदेशी कंपनी का काम बड़ी लगन और ईमानदारी से करते हैं, परंतु राष्ट्र का काम या भारतीय सरकार में नियुक्त होते ही आलसी और बेईमान हो जाते हैं। क्या इसका यह अर्थ है कि हम श्रेष्ठ गुलाम और निकृष्ट स्वतंत्र लोग हैं?” ये आलेख मेरे नहीं हैं पर इस स्तर के आस-पास का एक भी आलेख मुझे यहाँ नहीं मिला आप खुद अंदाज़ा लगाइए कि सिर्फ लिखने के लिए लिखना कहा तक उचित है… क्यों ना पाठक ही बना जाये मेरे तरह…

    Syeds के द्वारा
    October 26, 2011

    मयूर जी,सबसे पहले तो आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकानाएं. आपकी बातों से सहमत नहीं हूँ.क्यूंकि ब्लॉग का उद्देश्य न सिर्फ अच्छे लेख दूसरों तक पहुँचाना है…बल्कि अपनी बैटन को दूसरों के सामने रखना भी है… ज़रूरी नहीं कि इस बात के लिए हम इंतज़ार करें कि जब हम महान लेखकों कि तरह लिखने लगेंगे तब अपनी बात लोगों के सामने रखेंगे मुनासिब नहीं है…सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है जो कि संविधान से प्राप्त है…उसके लिए भाषा,ज्ञान इतय्दी कि कोई बंदिश नहीं है… धन्यवाद आपका http://syeds.jagranjunction.com

    Syeds के द्वारा
    October 26, 2011

    बैटन=बातों

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
October 16, 2011

प्रिय सैयद जी बाल रूप में आप को अबोध जी को राज कमल जी को देख बड़ी ख़ुशी होती है ..अबोध लोग ही ऐसी बातें करेंगे न ..सच आप के शीर्षक से ही शत प्रतिशत सहमत है हम ..ये राक्षस खाए जा रहा है हमारे ईमानदार गरीब लोग को बेचारे घुट घुट कर जी रहे हैं तंग हैं जिन्दगी से कहीं कुचले जा रहे हैं कहीं आत्महत्या ,,बहुत जरुरत है लोगों को एक जुट होने की …आभार आप का …भ्रमर ५ कहीं कोई विधवा जो विधवा पेंशन की हकदार है दफ्तरों के चक्कर काट काट कर मर जाती है…और विधवा पेंशन का पैसा ‘मृत’ नेताओं और कर्मचरियों(जिनकी आत्मा मर चुकी है) की बीवियां को मिल जाता है

    Syeds के द्वारा
    October 16, 2011

    भ्रमर भाई,सबसे पहले तो आपका धन्यवाद… यह आपका स्नेह व बड़प्पन है कि आप हम सब को देखकर ख़ुशी महसूस करते हैं इस भर्ष्टाचार रुपी राक्षस से हमें लड़ना होगा एक साथ मिलकर …इसका नामोनिशान मिटा देना होगा… http://syeds.jagranjunction.com

naturecure के द्वारा
October 14, 2011

syeds Ji सादर अभिवादन ! भ्रष्टाचार आज समाज के लिए नासूर बन चूका है सत्य का आईना दिखाती एक सुन्दर रचना ……………|

    Syeds के द्वारा
    October 16, 2011

    धन्यवाद डाक्टर कैलाश जी,

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय syeds भाई सादर अभिवादन ! अभ्युदय पर आपकी बधाई के लिए ह्रदय से आभार ! आपकी अगली रचना का इंतजार है …………

    naturecure के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय syeds जी, बहुत अच्छा सुझाव दिया है आपने | jj यदि इस पर अमल कर ले तो निश्चित रूप से लेखकों /पाठकों को बड़ी सहुलियत मिलेगी | एक निवेदन है आपसे आप कृपया अपना नाम एक बार हिंदी में लिखने की कृपा करें | “हम बहुत कन्फ्यूज हूँ ………….| “

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय syeds जी, http://naturecure.jagranjunction.com हमारा दूसरा ब्लाग है जिसमें स्वास्थ्य सम्बन्धी लेख हैं | मैं naturecure पर साईन इन था गलती से उसी से आपको रिप्लाई कर दिया आप कन्फ्यूज मत होना |

    Syeds के द्वारा
    October 19, 2011

    आदरणीय डाक्टर कैलाश साहब, जी, हमे आपके दुसरे ब्लॉग के बारे में भी पता है…हिंदी में आप ‘सैयद एस.’ लिख सकते हैं… धन्यवाद आपका…

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 25, 2011

    आदरणीय सैयद एस भाई सादर अभिवादन ! आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें |

    Syeds के द्वारा
    October 26, 2011

    डाक्टर साहब, आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं…

abodhbaalak के द्वारा
October 12, 2011

सय्यद भाई बहुत ही खूबसूरत रचना, आपका लेखन का तो मई पहले से ही ….. भर्ष्टाचार पर बड़ा ही विवेच्नाशील ……………….. ऐसे ही लिखते रहें …….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    syeds के द्वारा
    October 14, 2011

    प्रिय अबोध जी, तारीफ और प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद. http://syeds.jagranjunction.com

bharodiya के द्वारा
October 12, 2011

सैयदभाई नमस्कार आपने अपना फर्ज निभाया है । ऐसे लेख समय समय पर लिखने ही पडेंगे । आप के माध्यम से मैं अपनी बात रखना चाहुंगा । भ्रष्टाचार दो तरह का है, बडा और छोटा । छोटा भ्रष्टाचार रिवाज बन गया है । लोगों ने ईसे सर्विस टेक्ष के रूप मे स्विकार कर लिया है । लोगों को शोर्ट कट चाहिये मारो कुछ रुपये मुह पे और अपना काम निकाल लो । ज्यादातर जबरदस्ती मांगा जाता है, कोइ किस्से में लोग खुश हो के बिना मांगे दे देते हैं । ये जरूर भारत के अंदर के अर्थतंत्र का बेलेंस बिगाडता है , कुछ लोगों को खूश करता है कुछ को दूख देता है, लेकिन ये बडा नूकसान नही है । भारत का धन भारत में ही समा जाता है । आलिया का पैसा मालिया के पास, लालिया का कालिया के पास । बडा भ्रष्टाचार तो भारत के धन को भांप बना के उडा देता है । सारा कॅश विदेश चला जाता है । फीर यहा केश की कमी के नाम पर नया कॅश छापा जाता है । बिना ठोस कारण कॅश छापने से मेहन्गाई भी भडक जाती है । जरूर ये खेल खतम होगा ऐसी कामना ही हम कर सकते हैं ।

    syeds के द्वारा
    October 14, 2011

    भरोदिया जी, सही कहा आपने, छोटा भ्रष्टाचार(रिश्वतखोरी) रिवाज़ सा बन गया है…यह भी की घर का पैसा घर में रहेगा लेकिन जिस ग़रीब आदमी के पास अपिसा है ही नहीं वोह तो… हमें हिंदुस्तान से हर तरह के भर्ष्टाचार को मिटाना होगा.. बड़ा या छोटा.. http://syeds.jagranjunction.com

pramod chaubey के द्वारा
October 11, 2011

सैय्यद बाबू  भ्रष्टाचार के खिलाफ आपके संघर्ष में साथी बन संकू तो निश्यच मेरा जीवन सार्थक। 

    syeds के द्वारा
    October 12, 2011

    दूबे जी, हम सभी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाली फ़ौज के सिपाही हैं हैं और हमारा हथियार कलम है… http://syeds.jagranjunction.com

    Syeds के द्वारा
    October 26, 2011

    दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएं..

वाहिद काशीवासी के द्वारा
October 11, 2011

सैय्यद भाई, कम शब्दों में ही आपने बिलकुल सटीक बात कही है। हाँ ये ज़रूर कहूँगा कि भ्रष्टाचार का दायरा इससे भी बहुत बड़ा है और इसे एक वृहद एवं व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। आभार,

    syeds के द्वारा
    October 12, 2011

    सही कहा आपने वाहिद भाई, मुझे भी इस बात का एहसास था की भ्रष्टाचार के बजाये इसे रिश्वतखोरी कहना ज्यादा सही रहता …मै कोई लेखक या शायर नहीं हूँ.. बस किसी न किसी बहाने आप लोगों से जुदा रहना चाहता हूँ… http://syeds.jagranjunction.com

aditya के द्वारा
October 11, 2011

syed ji नमस्कार! बहुत ही बढ़िया आलेख. हमारे देश में या यूँ कहे हमारे अन्दर भरष्टाचार इस कदर भर गया है कि बिना लिए-दिए कुछ होता ही नहीं, इसके लिए हमें पहले अपनी सफाई करनी पड़ेगी. आदित्य http://www.aditya.jagranjunction.com

    syeds के द्वारा
    October 12, 2011

    आदित्य जी, सबसे पहले हमें अपनी ही सफाई करनी होगी… और हम एक मुहिम चला सकते हैं इसके लिए…हर आदमी को अपने स्तर से काम करना होगा… http://syeds.jagranjunction.com

jlsingh के द्वारा
October 11, 2011

सईद साहब, आदाब! भ्रष्टाचार रूपी रावणसे हम सभी पीड़ित हैं.इसे मिटने के लिए फल भी आम आदमी को ही करना होगा जिसकी शुरुआत भर हुई है हम सभी को इस जंग आगे बढ़ाना होगा! अच्छी पोस्ट के लिए बधाई!

    syeds के द्वारा
    October 11, 2011

    जवाहर भाई आदाब, भ्रष्टाचार रुपी रावन से हम पीड़ित भी हैं और इसे खिला पिलाकर बड़ा करने के ज़िम्मेदार भी हम ही हैं… http://syeds.jagranjunction.com

akraktale के द्वारा
October 10, 2011

सईद भाई ,सादर नमस्कार, अन्नाजी का आन्दोलन को व्यापक समर्थन मिलने का क्या कारण था?यही ना की देश का आमिर, गरीब और सरकारी भाषा में गरीबी रेखा के निचे वाला भी सभी इस बिमारी से त्रस्त है. दुःख इस बात का है की माल लेने वाला व्यक्ति कहता है ये तो हक़ है मगर जब उसी को माल देना पड़ता है तो कहता है यह भ्रष्टाचार है. इस अभिशाप से बचना है तो हम को खुद को ही सुधारना होगा,भ्रष्ट व्यक्ति के परिवार वालों को उसे प्रताड़ित करना होगा, तभी शायद आज निरंकुश होता भ्रष्टाचार थम सके. मुझे आदरणीय राजकमल जी द्वारा पेश उदाहरण से इत्तेफाक है की कई व्यक्ति काम हो जाने के बाद आत्म संतुष्टि के लिए भी कुछ न कुछ उपहार दे ही जाते हैं. भाई ठीक तो है “लें दें” मगर कुछ लोग यहाँ भी ऐसे हैं की “लें दें” पर आपत्ति करते हैं. भाई साहब अच्छे आलेख के लिए बधाई.

    syeds के द्वारा
    October 12, 2011

    अशोक जी, हम सभी कभी न कभी कोई न कोई काम करवाने के लिए राजकमल जी की भाषा में ‘प्यार’ का इस्तेमाल करते हैं…हमें रिश्वतखोरों/भ्रष्टाचारियों को घर से समाज से बहिष्कृत करना चाहिए… प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद… http://syeds.jagranjunction.com

    akraktale के द्वारा
    October 12, 2011

    सईद भाई मै पूर्णरूप से आप से सहमत हूँ भ्रष्टाचार पूरी तरह से समाप्त होना ही चाहिए.मेरी प्रतिक्रया की अंतिम पंक्तिया मात्र व्यंग है.

    Syeds के द्वारा
    October 16, 2011

    जी अशोक जी, हम समझ गए थे कि वोह व्यंग्य मात्र है…

Santosh Kumar के द्वारा
October 10, 2011

प्रिय सईद भाई ,.सादर नमस्कार बहुत ही अच्छी यथार्थ पोस्ट ,.बहुत बहुत धन्यवाद

    syeds के द्वारा
    October 11, 2011

    संतोष जी, धन्यवाद आपका… http:/syeds.jagranjunction.com

Rajkamal Sharma के द्वारा
October 10, 2011

प्रिय सैयद भाईजान आदाब ! यह मां की इस रावण से हम सभी दुखी है लेकिन हम लोगो की मानसिकता की एक बात बताता हूँ …. मेरे स्वर्गीय पिता जी जूनियर इंजीनियर थे ….. जब भी किसी का बिना पैसा लिए काम होता था तो वोह जबरदस्ती घर में छल्लिया +गन्ने +साग +गाढ़े दूध की कुलफिया +गुड की पट्टी वगैरह यह कह कर दे जाते थे की शर्मा जी यह हमारा प्यार है …..आपने हमार बिना फ़ीस के काम कर दिया है तो हमने खाने का समान दिया है ….. यह काम करवाने के लिए नहीं बल्कि काम हो जाने के बाद दिया है , इसलिए आप इसको गलत नियत से दिया नहीं कह सकते -इसको तो आपको लेना ही पड़ेगा …… यह उदाहरण हमारी मानसिकता को दर्शाता है की हम खुद भी बिना कूच दिए बिना काम न करवाने के किस प्रकार आदि हो गए है ….. भ्रष्टाचार हमारी रग -२ रच बस गया है …..इसलिए इससे छुटकारा कोई चमत्कार ही दिलवा सकता है ….. एक अच्छी पोस्ट पार मुबारकबाद :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/09/30/“आदरणीय-निशा-मित्तल-–-दा-ल/

    syeds के द्वारा
    October 12, 2011

    बिलकुल सही कहा आपने राजकमल भाई, भ्रष्टाचार को कहीं न कहीं हम ही बढ़ावा दे रहे हैं,अपना काम जल्दी या आसानी से करवाने के लिए ‘तोहफा’ देना तो आम बात है. अगर भ्रष्टाचार दूर करना है तो आम आदमी को सुधारना होगा…. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद… http://syeds.jagranjunction.com

nishamittal के द्वारा
October 10, 2011

सैय्यद जी भ्रष्टाचार अभिशाप है,परन्तु कहीं न कहीं हमारा योगदान इसको बढ़ावा देने में रहता है.

    Santosh Kumar के द्वारा
    October 10, 2011

    आदरणीय निशाजी ,.सादर प्रणाम आपका कहना बिलकुल सही है ,.हम भी इसको बढ़ावा दे रहे हैं ,..जैसा आदरणीय गुरुदेव जी ने प्रत्यक्ष उदाहरण ही दे दिया….मैं भी आप दोनों से कुछ कहने की आज्ञा मांगता हूँ ,.. हमारा(आम आदमी) जब कोई बहुत मुश्किल काम हो जाता है ,.तो ख़ुशी इतनी होती है की प्यार से थैला भर ही जाता है ,..(बिना पैसा दिए सरकारी काम होना तो मुश्किल ही है ),…इसमें एक छुपा हुआ डर भी रहता है कि यदि साहब को प्यार नहीं दिया तो कहीं अगली बार जरूरत पड़ने पर गड़बड़ ना हो जाये .. बाकी आजकल तो हर आदमी बेईमान है ,..पूरा ईमानदार को जगह जगह जिल्लत झेलनी पड़ती है ,…कोई नहीं सुनता उनकी,..कई तो अवसादग्रस्त तक हुए हैं ,.क्योंकि लोग उसे सनकी समझने लगते हैं ,.. मैं एक बात विश्वास से कह सकता हूँ कि कभी यदि नियति ने हम सबको सुधरने का मौका दिया तो सब जरूर सुधरना चाहेंगे ,..ये “चमत्कार” ही होगा,…लेकिन कब ???????????….असली चिंता यहीं से शुरू होती है ..आप दोनों को पुनः सादर प्रणाम

    syeds के द्वारा
    October 11, 2011

    बिलकुल निशा जी, हम ही सबसे ज्यादा ज़िम्मेदार हैं, अपना काम जल्दी करवाने या आसानी से करवाने के लिए ‘सेवा शुल्क’ का इस्तेमाल करते हैं… प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद..

    syeds के द्वारा
    October 11, 2011

    संतोष जी सही कहा आपने,आप आदमी अपना काम करवाने के लिए ‘तोहफे’ भी देता है साहब को… लेकिन उसके पीछे यही मानसिकता होती है की फिर इनसे हमारा काम पद सकता है…वोह असल में अगले काम के लिए रिश्वत होती है…